एक दिन तू भी ए खुदा
मोहब्बत करके तो देख ।
दिल लगा तू किसीसे
फिर उसे खोकर तो देख ।

कुछ ख्वाब दिल में बसा
कुछ पलकों पर सजाकर देख ।
गहरा दरया है इश्क़ भी
ये कश्ती डुबाकर तो देख ।

कुछ इस क़दर निभा तू
ये इश्क का सिलसिला ।
दिल मे बसाकर आशिकी
साँसों को साँसों से मिला ।

साथ बैठ जा कुछ पल 
कंधे पर रखके सर ।
ज़न्नत सा मिलने वाला
सुकून भी महसूस कर ।

आँखो ही आँखो में देख
हातों में उसका हात लेकर ।
सारी उम्र ना बिछडने का
उससे एक वादा तो कर ।

फिर मुस्कुराकर तू ,उस
वादे को निभाता चल ।
जिस तरह मुझे किया
तुही अलग हो जा कल ।

गुज़र रहा हूँ मैं
जिस दौर से आज कल ।
तू भी दो चार कदम
उसी रास्ते पर चल ।

फिर बता ते तू सबकों
इश्क़ में लगाव क्या होता है ?
दिल लगाने वाला आशिक़
बिछड़के इतना क्यों रोता है ।

कमी किसी की जिंदगी में
तू भी महसुस करके देख ।
होता क्या दर्द बिछड़ने का
तू भी तो सह करके देख ।

एक दिन तू भी ए खुदा
मोहब्बत करके तो देख ।
दिल लगा तू किसीसे
फिर उसे खोकर तो देख ।

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