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कृपिन की कहानियाँ

Krupin's stories is a collection of stories from Russia.

मयमतम्‌

मयमतम्‌ नामक ग्रंथमे संपूर्ण वास्तुशास्त्रकी चर्चा की गयी है। संपूर्ण वास्तु निर्माणमे इस ग्रंथको प्रमाण माना गया है। This is an ancient text about vastushastra.

वामन पुराण Vaman Puran

श्रीवामनपुराणकी कथायें नारदजीने व्यासको, व्यासने अपने शिष्य लोमहर्षण सूतको और सूतजीने नैमिषारण्यमें शौनक आदि मुनियोंको सुनायी थी ।

आरतियाँ Arati in Hindi

A collection of all the hindi aratis. Ganga ji , Shivji, Shani dev aarati.

श्रीनारदपुराण - पूर्वभाग

`नारदपुराण ’ में शिक्षा, कल्प, व्याकरण, ज्योतिष, और छन्द-शास्त्रोंका विशद वर्णन तथा भगवानकी उपासनाका विस्तृत वर्णन है।

श्रीविष्णुपुराण - चतुर्थ अंश

भारतीय जीवन-धारा में पुराणों का महत्वपूर्ण स्थान है, पुराण भक्ति ग्रंथों के रूप में बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। जो मनुष्य भक्ति और आदर के साथ विष्णु पुराण को पढते और सुनते है, वे दोनों यहां मनोवांछित भोग भोगकर विष्णुलोक में ज...

विष्णुपुराण - तृतीय अंश Vishnu Puran

विष्णूपुराण भगवान विष्णु की स्तुति बताते है ! इसके पठान से सरे दोष दूर हो जाते है।

विष्णु पुराण द्वितीय सर्ग Vishnu Puran

विष्णुपुराण भगवन की महिमा कथन करता है।

विष्णुपुराण प्रथम सर्ग Vishnu Puran
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विष्णुपुराण भगवान विष्णु की कथा तथा महिमा सुनती है। इसके पठान से सरे दोष निवारण होते है।

व्यासजी

हरिभक्त कवियोंकी भक्तिपूर्ण रचनाओंसे जगत्‌को सुख-शांती एवं आनंदकी प्राप्ति होती है।

श्रीविष्णुपुराण - प्रथम अंश - 1

भारतीय जीवन-धारा में पुराणों का महत्वपूर्ण स्थान है, पुराण भक्ति ग्रंथों के रूप में बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। जो मनुष्य भक्ति और आदर के साथ विष्णु पुराण को पढते और सुनते है,वे दोनों यहां मनोवांछित भोग भोगकर विष्णुलोक में जाते है।

अधिमासव्रत (Adhimasvrat)

व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।

हठयोगप्रदीपिका

हठयोगप्रदीपिका हठयोग से सम्बन्धित प्रसिद्ध ग्रन्थ है। यह संस्कृत में है और इसके रचयिता गुरु गोरखनाथ के शिष्य स्वामी स्वात्माराम थे। हठयोग के प्राप्त ग्रन्थों में यह सर्वाधिक प्रभावशाली ग्रन्थ है। हठयोग के दो अन्य प्रसिद्ध ग्रन्थ हैं - घेरण्ड संहिता तथा शिव संहिता। इस ग्रन्थ की रचना १५वीं शताब्दी में हुई। इस ग्रन्थ की कई पाण्डुलिपियाँ प्राप्त हैं जिनमें इस ग्रन्थ के कई अलग-अलग नाम मिलते हैं। वियना विश्वविद्यालय के ए सी वुलनर पाण्डुलिपि परियोजना के डेटाबेस के अनुसार इस ग्रंथ के निम्नलिखित नाम प्राप्त होते हैं |

भीम और बकासुर

भीम और बकासुर की कथा महाभारत की प्रसिद्द कथाओं में से एक है। You learn about the popular Bhim and Bakasur story from Mahabharat.

उपमन्यु ने सबक सीखा
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उपमन्यु बड़ा ही परिश्रमी और हंसमुख बालक था, इस कारण सभी लोग उससे बहुत प्रसन्न थे। जब कुछ दिनों बाद वह अपने आश्रम में लौटा तो गुरुजी ने उसे बुल भेजा। गुरुदेव ने पूछा, "बेटा उपमन्यु, क्या तुम इतने दिनों तक उपवास करते रहे?" "नहीं तो, गुरुदेव," उपमन्यु ने चकित होकर उत्तर दिया। "मेरी भी यही धारणा थी।" गुरुदेव ने कहा, “तुम काफी हृष्ट-पुष्ट लग रहे हो। तुमने महल के बढ़िया-बढ़िया पकवान छककर तो नहीं खाये?" "नहीं, गुरुदेव। मैंने महल के पक्वान नहीं खाये। सदा की तरह अपना भोजन गांव से ही मांग कर लाता था। गांव महल से तीन मील दूर ही तो है।" गुरुजी ने कहा, "लेकिन मैंने तो तुम आश्रम में भोजन लाते नहीं देखा।" उपमन्यु को सहसा याद आया कि आश्रम के नियम के अनुसार उसे सारा खाना गुरुजी के आगे लाकर रख देना चाहिए था। उसने अपना माथा ठोक कर भूल स्वीकार की ओर गुरुदेव से क्षमा मांगी। उस दिन उपमन्यु ने भिक्षा में मिला सारा भोजन लाकर गुरुजी के आगे रख दिया।

सात दिनों का पहरा
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कुरु वंश के उज्ज्वल नाम को कलंकित करने वाले इस अहंकारी राजा की, आज से सात रोज के अंदर, सर्पराज तक्षक के काटने से मृत्यु हो जायेगी।" इस भयानक शाप के शब्द शृंगी के मुख से निकले ही थे कि उनके पिता ने विचलित होकर अपनी समाधि तोड़ दी और भय से अपने पुत्र के मुंह की ओर देखने लगे। उनके बेटे ने क्रोध में आकर जो कुछ कह डाला था उससे मानों उन पर वज्रपात-सा हुआ। This is a story of King Parikshit and the curse he got from rishi shrunga.

मृत्यु से संवाद
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सत्यवान सावित्री की कथा. This is story of satyavan and savitri.

सोलह संस्कार

सोलह संस्कार सनातन धर्म के प्रमुख कर्मकांड हे जो हर मनुष्य के जीवन के अलग अलग पड़ाव पर किये जाते है।

श्याम सुन्दर तिवारी जी की कविताएं

श्याम सुन्दर जी मध्य प्रदेश के रहनेवाले है तथा शुद्ध हिंदी में कविताये लिखते है।

डॉ हिमांशु शेखर की ग़झले

डॉ हिमांशु शेखर का यह गझल संग्रह है !

शतनामावली (shatnamavali)

सभी हिंदी देवताओं की शतनामावली इस पुस्तके में उपलब्ध है।

नीति-शतक Niti Shatak

नीतिशतकम् भर्तृहरि के तीन प्रसिद्ध शतकों जिन्हें कि शतकत्रय कहा जाता है, में से एक है। इसमें नीति सम्बन्धी सौ श्लोक हैं। नीतिशतक में भर्तृहरि ने अपने अनुभवों के आधार पर तथा लोक व्यवहार पर आश्रित नीति सम्बन्धी श्लोकों का संग्रह किया है। एक ओर तो उसने अज्ञता, लोभ, धन, दुर्जनता, अहंकार आदि की निन्दा की है तो दूसरी ओर विद्या, सज्जनता, उदारता, स्वाभिमान, सहनशीलता, सत्य आदि गुणों की प्रशंसा भी की है। नीतिशतक के श्लोक संस्कृत विद्वानों में ही नहीं अपुति सभी भारतीय भाषाओं में समय-समय पर सूक्ति रूप में उद्धृत किये जाते रहे हैं।

हठयोगप्रदीपिका

हठयोग प्रदीपिका हठयोग से सम्बन्धित संस्कृत ग्रन्थ है। इसकी रचना गुरू गोरखनाथ के शिष्य स्वामी स्वात्माराम ने की थी।

भारत के राजवंश
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भारत देश के विस्तृत इतिहास में अनेक महान राजवंश हो चुके है। उनमे से कुछ राजवंश का इतिहास यहाँ उपलब्ध है।

नवरात्रों में माता की पूजा कैसे करें

नवरात्रों के विषय में मान्यता है कि देवता भी मां भगवती की पूजा किया करते है. नवरात्रों में मां भगवती के नौ विभिन्न रुपों की पूजा की जाती है. मां भगवती को शक्ति कहा गया है. नवरात्रों में नौ दिन क्रमश शैलपुत्री, ब्रह्माचारिणी, चन्द्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्ययायनी, कालरात्रि, मां गौरी और सिद्धिदात्रि की पूजा की जाती है.