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गिजरू का अमराक
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किसी समय अरब के एक गाँव में 'गिजरू' नामक एक आदमी रहता था। वह अपने कबीले का सरदार भी था। गिजरू को दुनिया में अगर जान से भी प्यारी कोई चीज़ थी तो यह उसका एक घोड़ा था। उस घोड़े का नाम था 'अमराक वह उस पर सो जान से न्योछावर था।

गिरनार का रहस्य
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किसी समय सौराष्ट्र में गिरनार के पास मोहन नाम का एक गरीब लड़का रहा करता था । वह जिस जगह रहता था वह पहाड़ों से भरी थी। लोगों का कहना था कि उन पहाड़ों में एक पर बड़ी अजीब अजीब चीजें नज़र आती हैं। इसलिए मोहन हर रोज़ उन पहाड़ों पर घूमने जाता था। उसे एक सुन्दर बाग दिखाई दिया। उसमें तरह तरह के पेड़ पौधे लगे हुए थे। तरह तरह के फूल खिल रहे थे और तरह तरह के पशु पक्षी स्वच्छन्द होकर विचर रहे थे। उस बगीचे के बीचोबीच गुलर का पेड़ था! और उसके निचे श्री दत्तात्रेय का स्थान था| यह सब देख कर मोहन का वहाँ से लौटने का मन न हुआ।

मुगल-ए-आजम
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मुगल ए आजम! सलीम और अनारकली के अमर प्रेम की गाथा

पारसमणी
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पुराने जमाने में पंढरपुर में एक भक्त ब्राह्मण रहता था। उसकी पत्नी कमला भी बड़ी पतिव्रता थी। वे स्त्री-पुरुष दोनों रोज बड़ी भक्ति के साथ देवी रुक्मिणी की पूजा करते थे। देवी ने उनको पारस पत्थर दिया। उस पत्थर का प्रभाव ऐसा था कि जो चीज़ उससे छू जाती तुरन्त सोना बन नाती । अब उस ब्राह्मण को किस चीज की कमी हो सकती थी! उसके दिन आराम गुजरने लगे।

राजपुत्र धीरसेन
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कहा जाता है कि किसी समय शाँतिनगर नामक शहर में शाँतसिंह नाम का राजा था। उसकी रानी शाँतिमती सब तरह से उसके योग्य स्त्री थी। वे दोनों अपनी प्रजा को बहुत प्यार करते थे और अपनी संतान की तरह उनकी देख भाल करते थे। उनका एक ही लड़का था जिसका नाम धीरसेन था।

पटेल का फैसला
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हिंदी लघुकथा पटेल का फैसला

किस्से लॉकडाउन के (अनकही अनदेखी)

किस्से लॉकडाउन के शीर्षक पुस्तक लेखिका वैशाली सिंघल द्वारा लिखित है। यह पुस्तक कोरोना वायरस के कारण लगे लॉकडाउन के कुछ अनकहे अनदेखे किस्सों पर प्रकाश डालती हैं। जिसका संबंध हम सबके जीवन से हैं। पुस्तक में प्रयोग की गई सभी तस्वीरे इंटरनेट के माध्यम से ली गई है। जिनका श्रेय उन लोगों को जाता है जिन्होंने यह सुंदर तस्वीरे इंटरनेट पर डाली हैं।

विचित्र वृक्ष
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विचित्र वृक्ष एक जादुई कथा हैं जो हमें यह सिख देती हैं की कृतघ्न की व्याधि पर कोई दवा काम नहीं करती।

नागवती
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नागवती एक ऐसी कथा हैं जो आपकी उत्कंठा के चरम पर आपको ले जाती है| सर्पराज के आशीर्वाद से रानी को ७ सुंदर पुत्रियों की प्राप्ती होती हैं| आगे चलकर उसमे से एक लड़की नागवती को मुसलमान फ़क़ीर जादूगर अगवाह कर लेता हैं और बंदी बना लेता हैं| नागवती का पति उसे छुड़ाने में असफल हो जाता हैं | आखिर कौन हैं जो नागवती को उस जादूगर के चंगुन से बचाएगा? जानने के लिए पढ़िए नागवती!!

नक्कू बकरी
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यह एक रूस के युक्रेन प्रान्त की एक लोककथा हैं! बुकस्ट्रक पे आपके लिए खास पेशकश हिंदी में

ब्रम्हराक्षस
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जब कंजूस मक्खीचूस जमींदार को ब्रम्ह राक्षस बतौर नौकर मिल जाता हैं तब क्या होता हैं? पढ़िए इस कहानी में.....

अमीर औरत
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अमीर औरत का गर्वहरण कैसे हुआ ये इस कहानी में पढिये

छोटे बच्चों के लिए -अस्सी घाट की कविताएँ
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छोटे बच्चों के लिए कुछ खास कविताएँ जब हम दादी के साथ घाट पर टहलने जाते थे तब वह हम बच्चों को ये कविताएँ सुनाती थी! जो कभी बचपन में सुनी थी और अभी भी याद है| आज भी अस्सी घाट पर बैठते हैं तो गंगाजी के पानी को देखकर खूब याद करते हैं | अस्सी घाट की कविताएँ! ये कविताएँ बच्चो को बहुत पसंद आएँगी ऐसा मुझे विश्वास हैं|

प्लेग की चुड़ैल
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प्लेग की चुड़ैल

आंतोन चेकॉव्ह कि कहानियाँ
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रुसी साहित्य के प्रतिभाशाली लेखक चेखोव की कहानिया काफी जानी मानी है.

विश्वास का फल
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बड़े-बड़े मकानों, बड़ी-बड़ी दूकानों, लंबी-चौड़ी सड़कों, एक से एक बढ़ के कारखानों और रोजगारियों की बहुतायत ही के सबब से नहीं, बल्कि अँगरेजों की कृपा से सैर तमाशे का घर बने रहने और समुद्र का पड़ोसी होने तथा जहाजी तिजारत की बदौलत आला दरजे की तरक्‍की पाते रहने के कारण इस समय कलकत्‍ता शहर जितना मशहूर और लक्ष्‍मी के कृपापात्रों का घर हो रहा है उतना बम्‍बई के सिवा और कोई दूसरा शहर नहीं।

कविता संग्रह

कौस्तुभ चौधरी द्वारा लिखी हुई कवितायेँ

मीराबाई
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मीराबाई जितनी लोकचर्चित है उतना ही उसका जीवनवृत्त अनबुझ पहेली बना हुआ है। वह राजकुल की जितनी मर्यादा में रही उतनी ही लोककुल की गगा बन भक्ति रस में लवलीन रही। यही कारण है कि बहुत कुछ कहने के बावजूद भी उसके सबंध में बहुत कुछ कहना ओर शेष रह गया है। यह एक ऐसी अद्भुत नारी है जिसके सबंध मे इतना अधिक लिखा जाता रहने पर भी कोई लेखन पूर्णता को प्राप्त नहीं होगा और मीरा नित नई होकर उभरती रहेगी।

अंगारों पर नृत्य

दहकते अंगारो पर महकते फूलों की तरह नाचना यों तो अनहोनी बात लगती है, परन्तु हमारे यहाँ ऐसे कई अजब कलाकरिश्मे प्रचलित हैं जिनके साथ यहाँ का कलाकार असाधारण-विचित्र होता हुआ भी सामान्य साधारण बनकर जीता है। आग पर फाग खेलना और राग अलापना अपने आप में कितना संश्लिष्ट चित्रण है। आइए, इनका पर्यवेक्षण करें।

प्रेम रस मेंहदी का

मेंहदी में दिया मेंहदी मे कई कलाएँ छिपी हुई हैं। जैसे मेह में कई कलाओं के रूप है। मेह है तो सब कुछ है। प्रकृति की सारी हरीतिमा है। रूप, रस, रंग और लावण्य है। ऐसे ही मेहदी में सब कुछ है। यह अपने में कई कलारंगों को रूपायित करने वाली है। है कोई ऐसा अन्य झाड़ जो लगता है, बंटता है, मडता है, रचना है और रस देता है प्रेम का, सुहाग का, सौभाग्य का, जीवन का।

नौ लाख देवियों का वृक्ष-झूला

राजस्थान की लोकनाट्य परम्परा मे मेवाड़ के गवरी और उसके साहित्य पर शोध प्रबंध लिखने के सिलसिले में में जब भीलों में प्रचलित सुप्रसिद्ध गवरी (राई) में वर्णित भारत-गीति-गाथा-कथा को पढ़ रहा था तब उसमें वर्णित देवी अंबाब का सातवें पियाल (पाताल) जाकर बडल्या (वट वृक्ष) लाना, देवल ऊनवा में उसकी स्थापना करना, मान्या जोगी का अपने चेलों सहित उसे देखने आना|

कुंवारों का देश
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गजस्थान के आदिवासी गरासियों का देश ‘कुंवारों का देश' कहलाता है। आबू पर्वत के पूर्व में फैली पहाड़ियों में चौइस गांव फैले हुए है। इन गाँवों का यह क्षेत्र भाखरपट्टा कहलाता है| इस पट्टे का सबसे बड़ा गांव जाम्बुडी है। इसी गांव में इन गरासियों का सबसे बड़ा आदमी “पटेल” रहता है। यह पटेल ही इनका राजा होता है। इसी का हुकम चलता है। फरमान चलता है। न्याय चलता है। सजा चलती है।

अजब लोकदेवता कल्लाजी

कल्लाजी का जन्मनाम केसरसिंह था। इनकी माता श्वेत कुंवर ईडर के लक्खूभा चौहान की पुत्री थी। यह बचपन से ही शिव-पार्वती की बड़ी भक्त थी। जब उसके कोई मदतगार कलामा न स आरामबस अपन विवाह के अन्तरवासे का एक पुतला बनाया शिव की आराधना में लीन हो गई। उसकी ऐसी तन्मयता देश शिव आन में प्राण प्रतिष्ठा कर दी।

पांच सौ वर्ष का अघोरी
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गिरनार में मिला पांच सौ वर्ष का अघोरी हमारे,यहा तो कई गिरी है मगर मुख्य गिरी तो दो ही हैं। पहला हिमगिर और दूसरा गिरनार एक पहाडोंका रुप है तो दुसरा भूमग ना रूप…! नर नारी का यह रूप नदी नालों भिमा को महान गाओं का गहन तपस्या स्थल है। कोई गुफा ऐसी नहीं मिलेगी जहा मम्मी के जैसे दिखने वाले मनस्वी नायाब साधू सन्यासी नहीं तपा हो।

मांडू में मौजूद-सिंहासन बत्तीसी

इतिहास को तोड़ मरोडकर उसे अपने अन्दाज से प्रस्तुत करने की हमारी आदत बहुत पुरानी है। बडेरों ने जो कुछ लिख दिया उसे उसी रूप में स्वीकार कर 'बड़ी हुकम कहने वालों ने बडा अनर्थ भी किया। नतीजा यह हुआ कि बहुत सारा अमलो इतिहास इति बनकर रह गया और उसक ह्रास किंवा हास ही अधिक हुआ। इस झमेले में सर्वाधिक लू पुराने खंडहरो, महलों, हवेलियों को लगी। इसीलिए ये हमें बटे रहस्य रोमाच भरे अजूबे और अद्भुत तो लगते हैं पर सही जानकारी के अभाव में भ्रमित करत और भटकन देते भी लगते है।