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मांडू में मौजूद-सिंहासन बत्तीसी

इतिहास को तोड़ मरोडकर उसे अपने अन्दाज से प्रस्तुत करने की हमारी आदत बहुत पुरानी है। बडेरों ने जो कुछ लिख दिया उसे उसी रूप में स्वीकार कर 'बड़ी हुकम कहने वालों ने बडा अनर्थ भी किया। नतीजा यह हुआ कि बहुत सारा अमलो इतिहास इति बनकर रह गया और उसक ह्रास किंवा हास ही अधिक हुआ। इस झमेले में सर्वाधिक लू पुराने खंडहरो, महलों, हवेलियों को लगी। इसीलिए ये हमें बटे रहस्य रोमाच भरे अजूबे और अद्भुत तो लगते हैं पर सही जानकारी के अभाव में भ्रमित करत और भटकन देते भी लगते है।

विश्व के विचित्र खजिने

विश्व के विचित्र खजानों वाला चित्तौड़ चित्तौडगढ़ सारे गढ गढ़यों का सिरमौर है इसीलिए गढ तो चित्तौडगढ़ कहा गया है। प्रारभ में यह चित्रकूट के नाम से प्रसिद्ध रहा। चित्तौड नाम उसके बाद पड़ा। आज इस चित्रकूट को सब भूल चुके है। जानने का चित्तौड को भी हम पूरानही जान पाये है। जितने भी महल खंडहर या अन्य ध्वसाशेष है, वे इतिहास की कलम पर अजाने ही बने हुए हैं|

रहस्य करणी माता के चूहों का
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राजस्थान में देवियों के कुल नौ लाख अवतार माने गये हैं। प्रसिद्ध रणक्षेत्र हल्दीघाटी के पास नौ लाख देवियों का स्थान वडल्या हींदवा आज भी बहुप्रसिद्ध है। इस सम्बन्ध में यहा के देवरो मे नौरात्रा मे रात-रात भर जो भारत गाथा गीत गाए जाते है इनमे इन देवियों का यश वर्णन मिलता है। इन माधारण असाधारण देवियों में चार असाधारण शक्तियुक्त होने से वे महाशक्तियां कही गई हैं। इनमें करणीजी एक हैं।

मृतक संस्कार- शंखादाल
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मृत्यु लोकजीवन का अन्तिम सस्कार है जिसकी समाप्ति प्रायः शोक एव विषाद मैं होती है। मृतात्मा की सुगत के लिये प्रत्येक जाति में अपने पारंपरिक क्रिया कर्म प्रचलित हैं। अनेक जातियों में नाना दस्तूरों के साथ मृत्यु गीत भी गाये जाते है।

पड़ की नक्षी में सतीत्व परीक्षा

राजस्थानी लोक चित्रांकन का एक प्रमुख प्रकार है पड़ चित्राकन इस चित्राकन में मुख्यत: कपडे पर लोकदेवता पाबूजी और देवनारायण की जीवन लीला चित्रित की हुई मिलती है। इन पेडों के भोपे गाव-गांव इस फैलाकर रात्रि को विशिष्ट गाथा गायकी में पड वाचन करते हैं।

सांस पीने वाला सांप
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राजस्थान के बाडमेर, जैसलमेर नामक रेगिस्तानी इलाकों में कोटडिया, वशमोचन, बेडाफोड, ओवा, कालिन्दर, गोरावर, चंदन, गो, बोगी, परड़, गोफण जैसे साप तो धातक हैं ही पर इनसे भी अधिक खतरनाक यहा का 'पीवणा सांप' बना हुआ है| जो मनुष्य की स्वांस पीकर अपना जहर छोड जाता है और सूर्योदय होते-होते उसे मरधट पहुचा देता है।

एकलिंगजी

सबसे बड़ी धजा वाले मन्दिरों पर धजा चढाने का भी पूरा संस्कार है। यदि इन धजाओं का ही अध्ययन किया जाय तो ऐसी बहुत सी सामग्री हाथ लग सकती है जो धजा परम्परा और उनके जुड़े देवता का रोचक इतिहास ही प्रस्तुत कर दे। धजाओं के विविध रंग, उनके आकार- प्रकार उनकी साज-सज्जा, उन पर लगे धगे विविध कलात्मक चित्र प्रतीक बड़ा रोचक दास्तान देते है।

रावण विवाह

जोधपुर के पास मंडोवर बड़ा प्राचीन और ऐतिहासिक नगर कहा जाता है। वहा जाकर कोई देखे तो उसे कल्पना नहीं करनी पड़ेगी पर पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग ने जो कुछ बताने को संग्रह कर रखा है, लोग बाग तो प्राय वही देखकर चले आते है।

दिव्यात्माओं का एक मेला

सन् १९८२ में दीवाली की घनी अधेरी डरावनी रात में लोकदेवता कल्लाजी ने अपने सेवक सरजुदासजी के शरीर में अवतरित हो मुझे चित्तौड़ के किले पर लगने वाला भूतों का मेला दिखाया तब मैंने अपने को अहोभाग्यशाली माना कि मै पहला जीवधारी था, जिसने उस अलौकिक, अद्भुत एवं अकल्पनीय मेले को अपनी आँखों से देखा।

जानवरों के स्मारक

हमारा देश ही कई प्रकार की विचित्रताओं से भरा पूग है जिसकी सानी विश्व में अन्यत्र कहीं देखने को नहीं मिलती, पर राजस्थान इन विचित्र- कथाओ में अपनी विशिष्ट विलक्षणता लिये है। जानवरों के स्मारक के लिये ये कथा बतायी गयी है| तो ईस प्रांत में जानवरों के ही स्मारक भी यहां पर्याप्त मात्रा में मिलते हैं।

छेड़ादेव लांगुरिया
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छेडा देव से तात्पर्य छेडखानी करने वाले देव से है। होली के दिनों में खासतौर से राजस्थान में ईलोजी और लांगुरिया; ये दोनों देव बड़े विचित्र रूप में याद किये जाते हैं।

लोकदेव ईलोजी

राजस्थान के लोकदेवताओ मे ईलोजी सर्वथा भिन्न किस्म के लोक्देवता जिनकी होली पर ही विशेष पूजा प्रतिष्ठा होती है। अन्य देवी देवताओं की तरह इनक मजाधजा मन्दिर भी नहीं होता और न विधिवत पूजा अनुष्ठान ही।

अपहरण गणगौर

अपहरण गणगौर राजस्थान का बड़ा ही रसवंती त्यौहार है। यहां के निवासियों में इन दिनों जितने इन्द्रधनुषी रंग विविध रूप चटखारे लिये देखे जाते हैं उनने अन्य किसी न्योहार पर देखने को नहीं मिलेंगे| राजस्थानी गोरिया जहां अपने अटल सुहाग और अमर बड़े के लिये गणगौर की बडी भक्ति-भावना से पूजा प्रतिष्ठा करती हैं वहां छोरिया होला के दृसंर दिन से ही मनवाछित वर प्राप्ति के लिये गवरल माता की पूजा-आराधाना जाती है।

कविता संग्रह

संगीता पाटील द्वारा रचित कविताओं का एक संग्रह

कुडा एवं ऊंदऱ्या पंथ

हमारे देश मे प्रचलित धार्मिक-अध्यात्मिक पंथों में कांचलिया अथवा कुडा एवं ऊंदऱ्या पंथ ऐसे विचित्र, अद्भुत और अनूठे पंथ हैं| जिनकी पत किसी दूसरे पंथ से नहीं की जा सकती। कुडा पंथ: इसे बीसनामी पंथ के नाम से भी जाना जाता है।

भूतों का मेला
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“जब जब भी आप चित्तौड जायेंगे तब जरूर दिवाली के दौरान जाईये, वहाँ प्रतिवर्ष भूतों का मेला लगता है वह भी दीवाली की गहन रात…!!!”

अनिष्टकारी विद्या-मूठ
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||ॐ हडुमान हठीला|| दे वज्र का ताला|| ||तो हो गया उजाला|| हिन्दू का देव|| ||मुसमान का पीर|| वो चलै अनरथ|| ||रैण का चलै|| वो चलै पाछली रैण को चलै|| ||जा बैठे वेरी की खाट|| दूसरी घडी|| ||तीसरी ताली वैरी की खाट मसाण में||

हिंदी कहानियाँ
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रामगोपाल भावुक द्वारा लिखी गयी हिंदी कहानियाँ

उत्सव भारत के
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रितेश ओझा द्वारा लिखे गए भारत के उत्सवों का चयन

मालती और माधव
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यह एक अनुठी प्रेमकथा है| भारत में रहनेवाले माधवी और माधव के उत्कट प्रेम, विरह एवं सामाजिक स्थितिओ का विवरण किया है|

हिंदी कहानियाँ

राजनारायण बोहरे द्वारा लिखी गयी हिंदी कहानियाँ

नल-दमयन्ती

नल दमयन्तीके सौंदर्य की प्रशंसा सुनकर उससे प्रेम करने लगा। उनके प्रेम का सन्देश दमयन्ती के पास बड़ी कुशलता से पहुंचाया एक हंस ने। दमयन्ती भी अपने उस अनजान प्रेमी की विरह में जलने लगी। कैसे हुआ उनका मिलन? क्या अघटीत घटा? कैसे उभारे वे दोनो आपने जीवन के दुविधा से? इस कथा में प्रेम और पीड़ा का ऐसा प्रभावशाली पुट है कि भारत के ही नहीं देश-विदेश के लेखक व कवि भी इससे आकर्षित हुए बिना न रह सके।

दुष्यन्त और शकुन्तला
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शकुन्तला ने अपने जन्म की सम्पूर्ण कथा राजा दुष्यन्त को बता देती थी। उसकी सुंदरता देखकर दुष्यन्त ने उससे गान्धर्व विवाह करने का प्रस्ताव दिया। शकुन्तला और राजा दुष्यन्त स्वेच्छा से गान्धर्व विवाह के बाद वह थोडे दिन आश्रम में रहे| जब वह अपनी राजधानी चाले गये उसके बाद शकुन्तला कि जिन्दगी का विवरण किया है|

चित्रांगदा
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चित्रांगदा यह महाभारत का एक पात्र है| यह चित्रांगदा कौन थी?? उसका महाभारत के कौनसे पात्र से संबंध है? उसकी जीवनगाथा क्या है? चित्रांगदा का नाम आपने कहाँ सुना है इसके बारे मे थोडा विचार किजीये…!

वसन्तसेना
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ईस पुस्तक में लेखक ने वसंतसेना और चारुदत्त के प्यार कि कहानी लिखी है| उत्कट प्रेम और बदले कि भावना का द्वंद्व यह लेखक ने प्रदर्शित किया है| यह अनुठी कहानी आपको पुराने जमने के रिती और समाज के रवायातों का चित्रण कराती है|