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दुखवा मैं कासे कहूँ मोरी सजनी

बादशाह दो दिन से शिकार को गए थे। आज इतनी रात हो गई, अभी तक नहीं आए। सलीमा चाँदनी में दूर तक आँखें बिछाए सवारों की गर्द देखती रही। आखिर उससे न रहा गया, वह खिड़की से उठकर, अनमनी-सी होकर मसनद पर आ बैठी। उम्र ओर चिन्ता की गर्मी जब उससे सहन न हुई, तब उसने अपनी चिकन की ओढ़नी भी उतार फेंकी और आप ही आप झुँझलाकर बोली - 'कुछ भी अच्छा नहीं लगता। अब क्या करूँ?' इसके बाद उसने पास रक्खी बीन उठा ली। दो-चार उँगली चलाई, मगर स्वर न मिला। भुनभुनाकर कहा - 'मर्दों की तरह यह भी मेरे वश में नहीं है।' सलीमा ने उकताकर उसे रखकर दस्तक दी। एक बाँदी दस्तबस्ता हाजिर हुई।

मंत्रसाधना : इच्छापूर्ति

मंत्रो में शक्ति होती है यह एक प्राचीन हिन्दू धारणा है। कुछ सिद्ध मन्त्र हम यहाँ आपके लिए प्रस्तुत कर रहे है।

महाभारत के विचित्र रिश्ते

महाभारत में द्रौपदी के पांच पति थे। इस प्रकार के रिश्ते आधुनिक जगत में कम होते ही है लेकिन पुराने ज़माने में भी बहुपतित्व शायद ही सूना था. जानिए और कौनसे विचित्र रिश्ते महाभारत में थे।

अधखिला फूल

'अधखिला फूल' के पृष्ठ 89 पंक्ति में 9 में 'पतोहें' और पृष्ठ 110 पंक्ति 20 में देवतों, और पृष्ठ 129 पंक्ति 10 में बिपतों, शब्द का प्रयोग हुआ है। व्याकरणानुसार इन शब्दों का शुद्ध रूप, पतोहुएँ, देवताओं, और बिपत्तियों, होता है। अतएव यहाँ पर प्रश्न हो सकता है, कि इन शुद्ध रूपों के स्थान पर, पतोहें इत्यादि अशुद्ध रूप क्यों लिखे गये? बात यह है कि पतोहू और बिपत्ति शब्द का बहुवचन व्याकरणानुसार अवश्य पतोहुएँ, और बिपत्तियाँ होगा, परन्तु सर्वसाधारण बोलचाल में पतोहू के स्थान पर पतोह और बिपत्ति के स्थान पर बिपत शब्द का प्रयोग करते हैं, अतएव व्याकरणानुसार इन दोनों शब्दों का बहुवचन पतोहें, और बिपतों किम्बा बिपतें यथास्थान होगा। इसके अतिरिक्त उच्चारण की सुविधा, कारण, अब पतोहुएँ और बिपत्तियों के स्थान पर पतोहें व बिपतों शब्दों का ही सर्वसाधारण में प्रचार है, इसलिए पतोहुएँ और बिपत्तियों के स्थान पर पतोहें और बिपतों लिखा जाना ही सुसंगत है। हाँ देवतों शब्द किसी प्रकार व्याकरणानुसार सिद्ध न होगा, क्योंकि देवता शब्द का बहुवचन जब होगा तो देवताओं ही होगा। अतएव इस शब्द के विषय में अशुद्ध प्रयोग का दोष अवश्य लग सकता है। परन्तु स्मरण रहे कि व्याकरणानुसार यद्यपि देवतों पद असिद्ध है तथापि सर्वसाधारण की बोलचाल में देवताओं शब्द नहीं है, देवता का बहुवचन उन लोगों के द्वारा देवतों ही व्यवहृत होता है, और समाज की बोलचाल को सदा व्याकरण पर प्रधानता है, अतएव देवताओं के स्थान पर देवतों पद का ही प्रयोग किया गया है। किन्तु यदि इसमें मेरा दुराग्रह समझा जावे तो देवतों शब्द के स्थान पर देवताओं शब्द ही पढ़ा जावे, इस विषय में मुझको विशेष तर्क वितर्क नहीं है।

चंद्रकांता संतति खंड ६

चंद्रकांता संतति में हम चंद्रकांता कि दुनिया एक और रहस्य समज सकते है।

चंद्रकांता संतति खंड ५

चंद्रकांता संतति में हम चंद्रकांता किट दुनिया एक और रहस्य समज सकते है।

चंद्रकांता संतति खंड ४

चंद्रकांता संतति में हम चंद्रकांता किट दुनिया एक और रहस्य समज सकते है।

चंद्रकांता संतति खंड ३

चंद्रकांता संतति में हम चंद्रकांता किट दुनिया एक और रहस्य समज सकते है।

चंद्रकांता संतति खंड २

चंद्रकांता संतति में हम चंद्रकांता किट दुनिया एक और रहस्य समज सकते है।

चंद्रकांता संतति खंड १

चंद्रकांता संतति में हम चंद्रकांता किट दुनिया एक और रहस्य समज सकते है।

चंद्रकांता

चंद्रकांता भारत की सबसे लोकप्रिय तिलस्मी प्रेम कहानी है। इसे सैकड़ो भाषाओंमे अनुवादित किया गया है।

अजातशत्रु

भारत का ऐतिहासिक काल गौतम बुद्ध से माना जाता है, क्योंकि उस काल की बौद्ध-कथाओं में वर्णित व्यक्तियों का पुराणों की वंशावली में भी प्रसंग आता है। लोग वहीं से प्रामाणिक इतिहास मानते हैं। पौराणिक काल के बाद गौतम बुद्ध के व्यक्तित्व ने तत्कालीन सभ्य संसार में बड़ा भारी परिवर्तन किया। इसलिए हम कहेंगे कि भारत के ऐतिहासिक काल का प्रारम्भ धन्य है, जिसने संसार में पशु-कीट-पतंग से लेकर इन्द्र तक के साम्यवाद की शंखध्वनि की थी। केवल इसी कारण हमें, अपना अतीव प्राचीन इतिहास रखने पर भी, यहीं से इतिहास-काल का प्रारम्भ मानने से गर्व होना चाहिए।

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कोरोना वायरस प्रकोप

वुहान कोरोना वायरस प्रकोप (2019–20) की शुरुआत एक नए किस्म के कोरोनवायरस (2019-nCoV) के संक्रमण के रूप में मध्य चीन के वुहान शहर में 2019 के मध्य दिसंबर में हुई। बहुत से लोगों को बिना किसी कारण निमोनिया होने लगा और यह देखा गया की पीड़ित लोगों में से अधिकतर लोग हुआँन सीफ़ूड मार्केट में मछलियाँ बेचते हैं तथा जीवित पशुओं का भी व्यापर करते हैं। चीनी वैज्ञानिकों ने बाद में कोरोनावायरस की एक नई नस्ल की पहचान की जिसे 2019-nCoV प्रारंभिक पदनाम दिया गया।

चंद्रकांता

चंद्रकांता भारत की सबसे लोकप्रिय तिलस्मी प्रेम कहानी है। इसे सैकड़ो भाषाओंमे अनुवादित किया गया है।

रहस्यमयी भारतीय धार्मिक स्थान -भाग 1

भारत में धर्म एक बहुत महत्वपूर्ण इकाई है | हम सब मंदिरों , गिरिजाघरों , गुरुद्वारों और मस्जिदों में जा कर भगवान् से अपने मन की मुरादें पूरी करने की गुज़ारिश करते हैं | लेकिन क्या आपको पता है की इनमें से कुछ धार्मिक स्थान ऐसे हैं जो अपने सीने में कई राज़ छुपाये हैं | आइये जानते हैं इस पहले भाग में ऐसे ही कुछ धार्मिक स्थानों के बारे में |

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हमारी दुनिया में कोई भी महोत्सव सिर्फ जश्न का प्रतीक नहीं होता है | ये एक जरिया होता है विभिन्न प्रान्त ,देश और वेशभूषा के लोगों के समागम का | आइये पढ़ते हैं ऐसे ही कुछ भव्य महोत्सव और त्योहारों के बारे में |

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हम सब मंदिरों में तो जाते हैं और कई छोटी छोटी चीज़े करते हैं जिनका मतलब हम सब को पता होता ही हैं ऐसे नहीं। आइये पढ़ते हैं कुछ रोचक वैज्ञानिक तथ्य इन प्रथाओं के बारें में ...

पथ के दावेदार

‘पथेर दावी’ उपन्यास-सम्राट स्व. श्री शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय की सर्वश्रेष्ठ रचना है। शरत बाबू के उच्चकोटि के, मौलिक, स्वदेशानुराग और देश सेवा के भावों से ओत-प्रोत होने के कारण इस उपन्यास का बड़ा महत्त्व समझा जाता है। जिस समय इस उपन्यास का प्रथम संस्करण बंगला में प्रकाशित हुआ था, उस समय एक तहलका-सा मच गया था और इसे खतरे की चीज समझकर ब्रिटिश-सरकार ने इस पुस्तक को जब्त कर लिया था। यह उपन्यास इतना महत्त्वपूर्ण समझा गया कि विश्व-कवि रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने भी, शरत बाबू की इस रचना की मुक्त-कंठ से प्रशंसा की।

दीवान ए ग़ालिब

उर्दू के इस महान शायर ने अपनी युगीन पीडाओं को ज्ञान और बुद्धि के स्तर पर ले जाकर जिस ख़ूबसूरती से बयां किया, उससे समूची उर्दू शायरी ने एक नया अंदाज़ पाया और वही लोगों के दिलो-दिमाग पर छा गया| उनकी शायरी में जीवन का हर पहलु और हर पल समाहित है, इसीलिए वह जीवन की बहुविधि और बहुरंगी दशाओं में हमारा साथ देने की शमता रखती है| अपने विशिष्ट सौन्दर्यबोध से पैदा अनुभवों को उन्होंने जिस कलात्क्मता से शायरी में ढला, उससे न सिर्फ वर्तमान के तमाम बंधन टूटे, बल्कि वह अपने अतीत को समेटते हुए भविष्य के विस्तार में भी फैलती चली गई| निश्चय ही ग़ालिब का यह दीवान हमें उर्दू-शायरी की सर्वोपरि सीमा तक ले जाता है|

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प्रेमचंद हिन्दी और उर्दू के महानतम भारतीय लेखकों में से एक हैं| प्रस्तुत है मुंशी प्रेमचन्द की उपन्यास और कहानियों का संकलन|

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प्राचीन रहस्यमयी भारतीय विद्याएँ

६४ कलाओं और ८ सिद्धियों के बारे में सभी ने सुना है | पर क्या आपको पता है की हमारे देश में कई ऐसी आश्चर्य चकित करने वाली विद्याएँ हैं जो किसी को भी हैरानी में डाल दें | इन विद्याओं का आधुनिक युग में काफी मजाक बना है लेकिन वैज्ञानिक भी मानते हैं की इनके पीछे कुछ तो सच है | आइये जानते हैं ऐसी विद्याओं के बारे में |

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अक्सर लोगों को शनि की साढ़े साती दशा की वजह से जिंदगी में काफी तकलीफों का सामना करना पड़ता है |ऐसा मानना की शनि हमेशा तकलीफ देता है गलत है क्यूंकि इसका प्रभाव व्यक्ति की कुंडली में इसके स्थान पर निर्भर होता है | आइये पड़ते हैं और ऐसी बातें शनि साढ़े साती के बारे में |

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