लताफ़त बे-कसाफ़त जलवा पैदा कर नहीं सकती
चमन ज़नगार है आईनह-ए-बाद-ए बहारी का

हरीफ़-ए जोशिश-ए दरया नहीं ख़वुद-दारी-ए साहिल
जहां साक़ी हो तू बातिल है द'वा होशयारी का

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दीवान ए ग़ालिब