कसरत-आराई-ए-वहदत[1] है परस्तारी-ए-वहम[2]
कर दिया काफ़िर इन असनामे-ख़याली[3] ने मुझे

हवसे-गुल का तसव्वुर[4] में भी खटका न रहा
अजब आराम दिया बे-परो-बाली[5] ने मुझे

शब्दार्थ:
  1. एकत्व की अनेक रूपता
  2. भ्रम की पूजा
  3. काल्पनिक प्रतिमाएं
  4. कल्पना
  5. पंखों का न होना
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दीवान ए ग़ालिब