ग़ैर लें महफ़िल में, बोसे[1] जाम के
हम रहें यूँ तिश्ना-लब[2] पैग़ाम[3] के

ख़स्तगी[4] का तुम से क्या शिकवा, कि ये
हथकंडे हैं चर्ख़े-नीली फ़ाम[5] के

ख़त लिखेंगे, गर्चे[6] मतलब कुछ न हो
हम तो आशिक़ हैं तुम्हारे नाम के

रात पी ज़मज़म[7] पे मय और सुबह-दम
धोए धब्बे जामा-ए-अहराम[8] के

दिल को आँखों ने फँसाया क्या मगर
ये भी हल्क़े[9] हैं तुम्हारे दाम[10] के

शाह की है ग़ुस्ले-सेहत[11] की ख़बर
देखिये, कब दिन फिरें हम्माम[12]के

इश्क़ ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दिया
वरना हम भी आदमी थे काम के

शब्दार्थ:
  1. चुम्बन
  2. सूखे होंठ
  3. संदेश
  4. थकावट,टूट-फूट
  5. नीला आसमान
  6. भले ही
  7. एक पवित्र ताल का पानी,
  8. तीर्थ-यात्रा पर पहने जाने वाले पवित्र वस्त्र
  9. छल्ले,फन्दे
  10. जाल
  11. स्वास्थ्य-स्नान
  12. नहाने की जगह
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